मधुबनी: प्रेमिका को छोड़कर मुंबई से भागे प्रेमी, फिर प्रेमिका ने उठाई यह कदम

कलुआही स्थित कपड़िया गांव के एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका के साथ धोखा करने की कोशिश की है, लेकिन वो इसमें सफल नहीं रहे। क्योंकि मुंबई की रहने वाली वह प्रेमिका कपड़िया गांव प्रेमी के घर पहुंच गई। लेकिन वहां पर आने के बाद युवक के परिजन उसे अपनी बहु स्वीकार करने से साफ़ मना करने लगे।

मधुबनी: प्रेमिका को छोड़कर मुंबई से भागे प्रेमी

उसके बाद प्रेमिका थाने भी गई, लेकिन वहां पर उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया। उसके बाद करणी सेना और सामाजिक महिला संगठन की मदद से उस प्रेमिका को न्याय मिल पाया है।

प्रेमिका ने इस घटना के बारे में बताई पूरी बात

हम जिस प्रेमिका के बारे में बात कर रहे हैं उसका नाम नीतू सिंह है जो मुंबई के अंधेरी की रहने वाली है, जहां पर वो ट्यूशन पढ़ाने का काम करती थी। उन्होंने कहा कि 6 साल पहले मुंबई के अंधेरी में अभिजीत सिंह से मुलाकात हुई और धीरे-धीरे वो दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे।

उसके बाद दोनों पिछले एक साल से मुंबई के मिलिट्री रोड़ अंधेरी में फ्लैट लेकर एक पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे। नीतू ने यह भी कहा कि उस दौरान वो जो ट्यूशन पढ़ाती थी, उससे उनके पास हर महीने 20 हजार रुपये आते थे और वो सभी पैसे अभिजीत को दे देती थी।

आगे नीतू ने कहा कि पिछले चार माह पहले अभिजीत मुझे लेकर मधुबनी आया था। लेकिन वो उसे मधुबनी रेलवे स्टेशन के नजदीक एक रेस्टोरेंट में छोड़कर खुद अपने गांव कपड़िया चला गया। फिर अभिजीत अपने घर पर चार दिन रहा और उस दौरान उन दोनों के बीच फोन से बात होती थी।

उसके बाद अभिजीत मधुबनी रेस्टोरेंट से नीतू को लेकर वापस मुंबई के अंधेरी चला गया। आगे नीतू ने कहा कि इस बार घर से आने के बाद अभिजीत पहले से बदला-बदला सा लग रहा था। उस दौरान फ्लैट का अग्रीमेंट भी समाप्त हो गया, जिस वजह से उन दोनों को 7 जुलाई तक मुंबई के कल्याण में स्थित एक होटल में रहना पड़ा।

प्रेमिका ने आगे कहा कि जब हम लोगों को होटल से निकाल दिया गया, उसके बाद नीतू को लेकर अभिजीत अपने मामा कुवर सिंह के पास मलाड स्थित गोरेगगांव चले गए। उस दौरान वो दोनों वहां पर तकरीबन 20 दिन रुके।

नीतू ने आगे कहा कि जब अभिजीत और वो उनके मामा के यहां ठहरे हुए थे, उसी दौरान अभिजीत के मम्मी, पापा और उसका भाई वहां पर पहुंच गया। फिर वो लोग अभिजीत को लेकर 3 से 4 घंटों के लिए कहीं चला गया।

उसके बाद अभिजीत के मम्मी-पापा उसे लेकर गांव कपड़िया वापस आ गए। जिस वजह से नीतू मुंबई में अकेली पड़ गई। आगे नीतू ने कहा कि वो अभिजीत से फोन पर बात करने की बहुत कोशिश कर रही थी, लेकिन बात नहीं हो पाया। क्योंकि उसका मोबाइल हमेश बंद बता रहा था। फिर उसे अभिजीत पर शक होने लगा।

उसके बाद नीतू 7 अगस्त को मुंबई से मधुबनी आई, उसके बाद वो कपड़िया गांव पहुंच गई। लेकिन अभीजीत के माता-पिता नीतू को पुत्र वधु स्वीकार करने से साफ़ मना कर दिया, जिस वजह से उस रात उसे गांव में ही गुजारना पड़ा।

नीतू ने आगे कहा कि वो खजौली थाना भी गई, लेकिन वहां पर उनकी कुछ नहीं सुनी गई। उसके बाद करणी सेना के जिला सचिव विकास सिंह, महिला समाज के सामाजिक राजश्री किरण और कुछ ग्रामीण लोगों को लेकर सबूत के साथ पुलिस अधीक्षक मधुबनी पहुंच गई।

लेकिन उस दौरान पुलिस अधीक्षक नहीं मिले। फिर एएसपी ने इस संबंध में खजौली थाना को पीड़ित महिला से आवेदन लेने के बाद इस पर कारवाई करने का आदेश दिया। फिर करणी सेना के जिला सचिव, प्रखंड अध्यक्ष तथा महिला समाज के महासचिव ने नीतू को उनके ससुराल में सम्मान दिलवाया। उस दौरान अभिजीत सिंह के माता-पिता ने नीतू को पुत्र वधु स्वीकार किया।

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